दुनिया के इस अग्रणी प्रतिबंध की पहली बड़ी कानूनी परीक्षा में दो दिन की सुनवाई शुरू हो रही है, जिसके तहत 50 लाख से अधिक खाते निलंबित हो चुके हैं।
ऑस्ट्रेलिया की हाई कोर्ट मंगलवार से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध की पहली बड़ी कानूनी चुनौती पर दो दिन की सुनवाई शुरू कर रही है। रेडिट और डिजिटल फ्रीडम प्रोजेक्ट, जो न्यू साउथ वेल्स के लिबर्टेरियन सांसद जॉन रडिक के नेतृत्व वाला एक एडवोकेसी समूह है, इस कानून को रद्द कराना चाहते हैं, और दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ हो रही है। यह प्रतिबंध 10 दिसंबर 2025 से लागू हुआ और फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, यूट्यूब, स्नैपचैट, एक्स, रेडिट, किक, थ्रेड्स और ट्विच सहित दस प्लेटफ़ॉर्म को 16 वर्ष से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं को अपनी सेवाओं से दूर रखने के लिए उचित कदम उठाने को बाध्य करता है।
मामला मुख्य रूप से इस पर टिका है कि क्या 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खाते रखने से रोकना राजनीतिक संवाद की निहित स्वतंत्रता पर अनुचित बोझ डालता है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का स्पष्ट गारंटीशुदा अधिकार नहीं है। रेडिट का तर्क है कि प्लेटफ़ॉर्म समाचार और राजनीतिक जानकारी का आम स्रोत हैं और किशोर राजनीति पर पोस्ट नहीं कर पाएंगे या राजनीतिक दलों के युवा संगठनों को फ़ॉलो नहीं कर पाएंगे; कंपनी का कहना है कि वह कानून को चुनौती देते हुए भी उसका पालन करती रहेगी। सरकार का कहना है कि कानून एल्गोरिदम, अंतहीन स्क्रॉलिंग, लगातार नोटिफ़िकेशन और लाइक जैसी सुविधाओं से होने वाले नुकसान को घटाता है, और जुलाई में दोनों किशोर याचिकाकर्ताओं के हटने के बाद वह डिजिटल फ्रीडम प्रोजेक्ट के मुकदमा दायर करने के अधिकार पर सवाल उठा रही है। कानूनी विशेषज्ञ बँटे हुए हैं: ऐनी ट्वोमी को रेडिट के लिए संभावित गुंजाइश दिखती है, जबकि ल्यूक बेक को याचिकाओं के विफल होने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने कहा है कि दसों सेवाओं में 50 लाख से अधिक खाते निलंबित किए गए हैं, हालांकि विपक्ष का सवाल है कि क्या यह आँकड़ा बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है, और सरकार ने प्लेटफ़ॉर्म-वार ब्योरा जारी नहीं किया है। अब तक किसी कंपनी पर जुर्माना नहीं लगा है, पर गंभीर या बार-बार उल्लंघन पर 9.9 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का दंड हो सकता है, और ई-सेफ़्टी कमिश्नर फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, टिकटॉक और यूट्यूब के अनुपालन की जाँच कर रही हैं, जबकि रिपोर्टों के अनुसार कई किशोरों ने आयु जाँच को दरकिनार कर दिया है। संसद डिजिटल ड्यूटी ऑफ़ केयर विधेयक पर भी बहस कर रही है, जिसके बारे में सरकार का तर्क है कि वह प्लेटफ़ॉर्म से वही कदम उठवाएगा जो प्रतिबंध उठवाता है।



