इस सर्दी ऊनी कपड़ों की देखभाल की व्यावहारिक गाइड: केयर लेबल का मतलब, हल्के हाथ से धोना, समतल सुखाना और सुरक्षित भंडारण।

ऊनी स्वेटर अलमारी के सबसे टिकाऊ कपड़ों में से हैं, लेकिन ज़्यादातर नुकसान पहनने से नहीं, बल्कि गर्मी, ज़ोर से रगड़ने और लापरवाह भंडारण से होता है। पहला कदम हमेशा केयर लेबल पढ़ना है। इससे पता चलता है कि कपड़ा मशीन में धुल सकता है, केवल हाथ से धोना है या ड्राई क्लीन कराना है, और इसका पालन रेशों व फिटिंग की रक्षा करता है। ऊन को हर बार पहनने के बाद धोने की भी ज़रूरत नहीं होती; स्वेटर को रात भर हवा में रखना और छोटे दागों को अलग से साफ़ करना अक्सर काफ़ी होता है, जिससे कपड़ा कम घिसता है। हल्के गोले बनना ऊनी बुनाई में सामान्य घर्षण है, खराब गुणवत्ता का संकेत नहीं।

जब स्वेटर धोना ज़रूरी हो, उसे उल्टा करें और ठंडे पानी में हल्का या ऊन के लिए बना डिटर्जेंट इस्तेमाल करें। उसे लगभग दस से पंद्रह मिनट भिगोएँ, कम से कम हिलाएँ और कभी मरोड़ें या निचोड़ें नहीं, क्योंकि गीला ऊन आसानी से खिंच जाता है। पानी को हल्के से दबाकर निकालें, स्वेटर को साफ़ तौलिये में लपेटकर नमी सोखें, फिर आकार ठीक करके सीधी गर्मी और तेज़ धूप से दूर समतल सुखाएँ। गीला स्वेटर न टाँगें, क्योंकि उसका वज़न कंधों का आकार बिगाड़ सकता है, और जब तक लेबल साफ़ अनुमति न दे, ड्रायर से बचें।

अच्छा भंडारण देखभाल को पूरा करता है। स्वेटर रखने से पहले उन्हें धोएँ या हवा लगाएँ और पूरी तरह सूखा सुनिश्चित करें, क्योंकि कीड़े रेशों पर शरीर के तेल और खाने के अंश की ओर आकर्षित होते हैं। बुने कपड़ों को टाँगने के बजाय तह करें और उन्हें बंद प्लास्टिक की जगह सूती थैले या डिब्बे में रखें। देवदार या लैवेंडर की पोटली कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकती है, पर यह गारंटी नहीं है, इसलिए रखे हुए स्वेटरों को बीच-बीच में जाँचते रहें। छोटे छेद फैलने से पहले ठीक करें और गोले हटाने के लिए फैब्रिक शेवर या कंघी हल्के हाथ से इस्तेमाल करें।