नॉर्वे के शोधकर्ताओं ने NAR Molecular Medicine में बताया कि रूमेटाइड आर्थराइटिस और अन्य सूजन संबंधी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाले JAK अवरोधकों ने प्रयोगशाला की कोशिका और ऑर्गेनॉइड मॉडलों में एंटीवायरल जीन गतिविधि घटाई और कई वायरसों को फैलने में मदद की।

नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NTNU) के शोधकर्ताओं के अनुसार सूजन-रोधी दवाओं की व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली श्रेणी, यानी जेनस काइनेज (JAK) अवरोधक, कुछ वायरसों के लिए कोशिकाओं को संक्रमित करना और फैलना आसान बना सकती है। NAR Molecular Medicine में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि रूमेटाइड आर्थराइटिस तथा अन्य सूजन और ऑटोइम्यून स्थितियों में दी जाने वाली ये दवाएँ एक प्रतिरक्षा संकेत मार्ग को दबाती हैं, जो सामान्यतः स्वस्थ कोशिकाओं को वायरस के हमले से बचाने में मदद करता है। NTNU की विज्ञप्ति के अनुसार प्रोफ़ेसर डेनिस कैनोव ने इसे चौंकाने वाला और संभावित रूप से गंभीर दुष्प्रभाव बताया।

टीम ने विषाणु-विज्ञान की विधियों, जीन-अभिव्यक्ति विश्लेषण और ऑर्गेनॉइड तकनीक को मिलाया तथा फेफड़ों, आँखों और मस्तिष्क की कोशिकाओं के साथ प्रयोगशाला में उगाए गए लघु अंग मॉडलों का परीक्षण किया। बैरिसिटिनिब सहित JAK अवरोधकों ने वायरल संक्रमण से लड़ने वाले जीनों की गतिविधि घटा दी। प्रयोगों में जो वायरस अधिक आसानी से फैले उनमें रिफ्ट वैली फीवर वायरस, इन्फ्लूएंज़ा A, एडेनोवायरस और कोविड-19 का कारण बनने वाला SARS-CoV-2 शामिल हैं। प्रथम लेखक एर्लेंड रावलो ने कहा कि अव्यक्त या सक्रिय वायरल संक्रमण वाले मरीज़ों के लिए ये दवाएँ छिपा जोखिम हो सकती हैं।

ये नतीजे प्रयोगशाला मॉडलों से आए हैं, इसलिए वे अकेले यह नहीं बताते कि इन दवाओं को लेने वालों के लिए जोखिम कितना बड़ा है, और लेखक यह भी नहीं कहते कि मरीज़ इलाज बंद कर दें। वे सुझाव देते हैं कि वायरस के बढ़ते प्रसार के समय चिकित्सक इन दवाओं को लिखने में सावधानी बरतें, और खासकर प्रकोप या महामारी के दौरान इनके सर्वोत्तम उपयोग पर और अध्ययन की सिफ़ारिश करते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार यही प्रभाव नियंत्रित प्रयोगशाला परिस्थितियों में, जैसे टीका विकास या एंटीवायरल उम्मीदवारों के परीक्षण में, उपयोगी भी हो सकता है।