वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरोप के काले-पीले फायर सैलामैंडर की त्वचा की ग्रंथियों और विषैले स्रावों में जैव-प्रतिदीप्ति दिखती है, पर इसका उद्देश्य और जिम्मेदार यौगिक अभी अज्ञात हैं।

शोधकर्ताओं ने बताया है कि यूरोप के सबसे पहचाने जाने वाले उभयचरों में से एक, फायर सैलामैंडर, पराबैंगनी प्रकाश में हरे और सियान रंग में प्रतिदीप्त होता है। मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर केमिकल इकोलॉजी की सामग्री पर आधारित साइंसडेली के अध्ययन-सारांश के अनुसार, यह चमक पीले निचले हिस्से और बगलों पर सबसे अधिक है और मुख्यतः त्वचा की ग्रंथियों तथा उनसे निकलने वाले स्रावों से आती है। ये स्राव जानवर के शरीर से निकलने के 24 घंटे से अधिक समय बाद भी चमकते रह सकते हैं। यह प्रजाति आईयूसीएन की रेड लिस्ट में संवेदनशील श्रेणी में है और आमतौर पर नम जंगलों, धाराओं और पर्वतीय क्षेत्रों में रहती है, जहाँ आवास का नुकसान और विखंडन बढ़ रहा है।

यह प्रभाव जैव-प्रतिदीप्ति है: त्वचा के यौगिक पराबैंगनी प्रकाश को सोखते हैं, जिसे मनुष्य नहीं देख सकते, और उसे दृश्य प्रकाश के रूप में लौटाते हैं। इसके लिए बाहरी प्रकाश स्रोत चाहिए, और यह जैव-संदीप्ति से अलग है, जिसमें जुगनू जैसे जीव रासायनिक क्रिया से अपना प्रकाश स्वयं बनाते हैं। पहले माना जाता था कि प्रतिदीप्ति लगभग केवल समुद्री जीवों में होती है, जमीन पर बिच्छू एक उल्लेखनीय अपवाद थे, लेकिन हालिया शोध ने इसे सरीसृपों, पक्षियों और उभयचरों में भी पाया है। बार्सिलोना के प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय, IBE (CSIC-UPF) और मैक्स प्लांक संस्थान के शोधकर्ताओं वाली टीम का कहना है कि उसे सैलामैंडर की त्वचा के स्रावों में प्रतिदीप्ति की कोई पूर्व रिपोर्ट ज्ञात नहीं थी, जबकि दशकों से उनका रासायनिक अध्ययन होता रहा है।

इस चमक का उद्देश्य अभी अनसुलझा है। शोधकर्ता दो अपरीक्षित परिकल्पनाएँ बताते हैं: यह अंधेरे, घने आवासों में सैलामैंडरों को एक-दूसरे को पहचानने में मदद कर सकती है, जहाँ चाँदनी में दिन के प्रकाश की तुलना में पराबैंगनी और बैंगनी प्रकाश का अनुपात अधिक होता है, या यह उनके काले-पीले पैटर्न और विषैले क्षारों वाले चेतावनी संकेत को और मजबूत कर सकती है। जिम्मेदार रसायन की पहचान नहीं हुई है और वैज्ञानिक मानते हैं कि यह इस प्रजाति में अब तक अज्ञात अणु हो सकता है। टीम अब इसकी विशेषताएँ पहचानने पर काम कर रही है, जिससे पता चल सकता है कि प्रतिदीप्ति व्यवहार या जीवित रहने के लिए मायने रखती है या नहीं, और कैटालोनिया में उभयचर संरक्षण को मदद मिल सकती है। ये निष्कर्ष एक ही शोध टीम की रिपोर्ट पर आधारित हैं और प्रस्तावित कार्यों को खुले प्रश्न ही समझा जाना चाहिए।